क्या लिखूँ कैसे लिखूँ , पद्य लिखूं या गद्य लिखूँ
लिखूँ कहानियां प्रेमचंद सी या तुलसी सी कबिता - छंद लिखूँ.
मासूम बचपन की आज़ादी, स्कूल – कॉलेज की बृहद पढ़ाई
कर्रिएर का वो कठिन संघर्ष, या बढती उम्र का द्वन्द लिखूँ.
गुल्ली-डंडा कांची-कंचा, चांदनी रात का वो झाबर खेल
छिपी-छिप्पम और कबड्डी या नौटंकी-मेले का स्वछन्द लिखूँ.
दुद्धी,पटरी की घुटाई, गिनती पहाड़े की रटाई
मास्टर जी की वो पिटाई या हल्ला-गुल्ला बंद लिखूँ.
गणित - विज्ञान के लंबे सूत्र, परिभाषा की बोझिल भाषा
अलंकार-व्याकरण की वो गुत्थी या साहित्य का मकरंद लिखूँ.
रोज़गार के ढेरों एप्लीकेशन, उसके बाद का कम्पटीशन
फेल होने की वो मायूसी या सफलता का आनन्द लिखूँ.
नौकरी की आपाधापी,रोमांस- मस्ती और फिर शादी
बीबी-बच्चों की वो जिम्मेदारी या माँ-बाप की सेहत मंद लिखूँ.
पन्ने इतिहास के लिखूँ या विज्ञान के ज्ञान बिखेरूं
माया का वो कसता फन्दा या भक्ति परमानन्द लिखूँ.
पैरों-घुटनों और बदन का दर्द,पेट,फेफड़ों ,साँस का मर्ज़
शिथिल पड़ती वो इन्द्रियों का मर्म या जीवन के अनुभव चंद लिखूँ.